भगवान् शिव की आरती – शीश गंग अर्धंग पार्वती सदा विराजत कैलाशी
कर मध्ये कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता, जगकरता जगहरता जगपालन कर्ता ।।
तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती
माँ-बेटे का इस जग में है बड़ा ही निर्मल नाता
अक्षमाला बनमाला रूण्डमाला धारी, चंदन मृगमद चंदा भाले शुभकारी ।।
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता ।
सब की बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
तेर भक्त जानो पर Source मैया भीड़ पड़ी है भारी,
नहीं माँगते धन और दौलत, ना चाँदी, ना सोना
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे, तीनो रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे ।।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना॥
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नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोने,
सब पे करुणा दर्शाने वाली, सबको हर्षाने वाली